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शहर पर कविता | Short Poem on City in Hindi

 एक शहर

एक शहर मैंने देखा है
रहता है जो जगरमगर
कभी नहीं बिजली जाती है
ऐसा है वह बना शहर

ऐसे लोग वहां रहते है
लड़ना आता नहीं जिन्हें
लड़ना भिड़ना ठीक नहीं है
यह सब भाता नहीं जिन्हें

पुलिस नहीं है, नहीं मुकदमे
न्यायालय का नाम नहीं
दिनभर सब मेहनत करते हैं
पलभर भी आराम नहीं

खेती करते है किसान सब
लड़के सारे पढ़ते है
अफसर नेता या व्यापारी
मेहनत करके बढ़ते है

दिन में काम रात में मिलकर
गाते और बजाते है
नाटक करते किस्से कहते
ऐसे मन बहलाते है

इसी शहर में चलो चलें हम
खुशियाँ है दिन रात यहाँ
मन को बुरी लगे ऐसी है
नहीं एक भी बात जहाँ

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