Short Poem In Hindi Kavita

तारों पर कविता | Poem on Stars in Hindi

 

तारे कहाँ गए ! "गोपाल माहेश्वरी"


ढूंढों ढूंढों कहाँ गए?
सारे सारे कहाँ गए!
पूरी रात गगन पर थे,
सुबह सकारे कहाँ गए

चंदा मुंह लटकाए है
इसने कहीं छुपाए है
यह टेढ़ा वे भोले हैं
उफ़ बेचारे कहाँ गए

कूदे ना हों नदिया में
ढूंढों जंगल बगिया में
भटक न जाए राह कहीं
ढूंढों प्यारे कहाँ गए?

सपने में तो आए थे
हमने खेल रचाए थे
कमरे में तो कहीं नहीं
फिर यह सारे कहाँ गए

टंके मिले कुछ चुनर पर
कुछ लटके है झूमर पर
लेकिन पूरे नहीं हुए
बचे सितारे कहाँ गए

तारों का विद्यालय "सुनैना अवस्थी"

आसमान में चंदा मामा
सांझ ढले आ जाते
नन्हें तारों का विद्यालय
नभ में रोज लगाते
जगमग आसमान में होती
सारी रात पढ़ाई
सब मिलजुलकर शिक्षा पाते
करते नहीं लड़ाई

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