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पुस्तक मेला पर कविता | Poem on Pustak Mela in Hindi

 पुस्तक मेला जाऊँगी

मम्मी मैं भी संग आपके
पुस्तक मेला जाउंगी
ढेर किताबें छांट छांट कर
रंग बिरंगी लाऊँगी

वहां किताबों का पूरा ही
एक समुन्द्र रहता है
कल कल करता छल छल करता
अपनी धुन में बहता है
उसमें से तलाश करने पर
सुंदर मोती पाउंगी
मम्मी मैं भी संग आपके
पुस्तक मेला जाउंगी

कविता और कहानी की मैं
सचमुच हूँ शौकीन बड़ी
पन्ने पलट छांट लूंगी झट
दुकानों पर खड़ी खड़ी
सच मानो माँ, किसी जगह पर
देर न तनिक लगाउंगी
मम्मी मैं भी संग आपके
पुस्तक मेला जाउंगी

यदि सामान्य ज्ञान की पुस्तक
अच्छी सी दिख गई कहीं
उसको तो खरीद ही लूँगी
ज्यादा सोचे बिना वहीँ
ज्ञान और विज्ञान लोक में
गहरी पैठ बनाउँगी
मम्मी मैं भी संग आपके
पुस्तक मेला जाऊँगी

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