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परी पर कविता | Poem on Pari in Hindi

 
कितनी परियाँ

मुन्नी से बोलीं मम्मी
सपने में मैंने तो कल
तरह तरह की परियों का
देखा रंग बिरंगा दल!

सुनकर नन्हीं मुन्नी ने
खुश हो मारी किलकारी
पूछा मम्मी, बतलाओं
कितनी थीं परियाँ सारी?

मम्मी कुछ कहतीं उससे
पहले ही नन्हा मुन्ना
तुतलाकर यों बोल उठा
मुन्नी का भाई चुन्ना

मम्मी ने चछ्मा लख देतीं
छोने छे पहले हल दिन
उछ्को पहने बिना भला
वो कैसे छ्कती थीं गिन?

एक परी ने


एक परी ने कल सपने में
दिए बहुत से पैसे
आओ मम्मी तुम्हें सुनाऊं
खर्च किए सब कैसे?

दादा जी को एनक लाया
दादी जी को साड़ी
फिर मैंने पापा को ले दी
नीली मोटरगाड़ी

भैया जी को बल्ला लाया
दीदी को अलमारी
और तुम्हारी लिए खरीदी
घर की चीजें सारी

मम्मी ने यह कहकर झट से
उसको गले लगाया
अपने लिए नहीं क्यों पगले
कुछ भी लेकर आया?

परी और किताब

रात मेरे सपनों में आई
परी सुनहरे पंखों वाली
हाथ प्यार से फेरा सिर पर
दी किताब फिर एक निराली

कथा कहानी गीत थे उसमें
सुंदर सुंदर थे संदेश
रंग बिरंगे चित्र बने थे
इन्द्रधनुष जैसा परिवेश

प्यार लुटाते रहना सब पर
कुछ ऐसी थी प्यारी सीख
पेड़ नदी पर्वत पशु पक्षी
इन्हें समझना अपना मीत

ध्यान पढ़ाई पर तुम देना
बड़ों का करना आदर खूब
टीचर जी की बात मानना
साफ़ सफाई रखना खूब

अगला पन्ना खुलता जब तक
टूट गये सपने मेरे
जितने पन्ने पढ़ पाए थे
काम बहुत आए मेरे

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