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छुट्टी पर कविता | Poem On Holidays in Hindi


 छुट्टी का दिन "चंद्रपाल सिंह यादव मयंक" 

हफ्ते में जब हो रविवार
मौज मजा आता तब यार

विद्यालय में छुट्टी रहती
मचती मौज मजे की धूम
उस दिन हम सारे ही बच्चे
मस्ती में उठते है झूम

क्रिकेट मैच कभी होते हैं
या टीवी पर जम जाते है
सच पूछों तो टीवी पर ही
हम आनन्द उठा पाते है

टीवी ने हम सब बच्चों पर
किया बड़ा ही उपकार है
हफ्ते में जब हो रविवार
मौज मजा आता तब यार

आज हमारी छुट्टी है


आज हमारी छुट्टी है
स्कूल से हो गई कुट्टी हैं

सब कुछ उल्टा पुल्टा घर में
झाड़ू पोंछा बर्तन पल में
अब पापा निपटाएंगे
माँ की हो गई छुट्टी है
आज हमारी....

पार्क में सब मिल जाएंगे
मौजें खूब मनाएंगे
हरी घास फूलों के नीचे
सोंधी सोंधी मिट्टी है
आज हमारी....

झूले पतंग और खेल खिलौने
पापा मम्मी भैया दीदी
गोलगप्पे और आलू टिक्की
चटनी सबमें खट्टी है

आज हमारी छुट्टी है
स्कूल से हो गई कुट्टी हैं

हो गई छुट्टियाँ " हरीश कुमार अमित"


करें खेल अब नए नए
पढ़ने के दिन गए गए
अब तो हो गईं छुट्टियाँ
खाली अब हम भए भए

करो मौज और हल्ला गुल्ला
खाओ पिज्जा या रसगुल्ला
अब हम पर नहीं बंदिश कोई
पास हमारे वक्त है खुल्ला

नानी के घर दादी के घर
इन छुट्टियों में जाएगे हम
छुट्टी के इक इक दिन को
खुशियों से चमकाएंगे हम

आज न दफ्तर जाओं मम्मी

आज न दफ्तर जाओ मम्मी
कुछ पल साथ बिताओ मम्मी

खेलो कूदो साथ जरा तुम
मेरे संग मुस्काओ मम्मी

ब्रेड मटर मत आज खिलाओ
रोटी दाल बनाओ मम्मी

मैं मानूंगी सारी बातें
पहले साथ घुमाओ मम्मी

हाथ न लूंगी मोबाइल मैं
पुस्तक मुझे पढाओ मम्मी

आउंगी कक्षा में अव्वल
संग संग नाचो गाओ मम्मी

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