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सर्कस पर कविता |Poem On Circus in Hindi

 सर्कस

सर्कस भी क्या सर्कस है
अच्छे अच्छे बेबस हैं

जंगल के जो राजा थे
मानव के आगे वे शेर
सेवक बनकर घूम रहे
देखों यह किस्मत का फेर

बंदर बाजा बजा रहा
हाथी नाच दिखाता है
श्वान साइकिल तेजी से
घेरे में दौडाता है

मैना बग्घी में बैठी 
तोता उसकों खींच रहा
घोडा दो पैरों पर चलता
कैसा अचरज हुआ यहाँ

लड़का रस्सी पर चलकर
खेल अनोखे दिखलाता
जोकर अपने करतब से
सबके मन को खुश करता

अजब अजूबा सर्कस हैं
सबका प्यारा सर्कस हैं

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