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बस्ते पर कविता | Baste Par Kavita


 मेरा बस्ता

मेरा बस्ता मेरा बस्ता
यह पुस्तक वाला गुलदस्ता
इसके भीतर भरी सरसता
क्यों हो मेरी हालत खस्ता
इसमें मेरी पेन्सिल कॉपी
इसमें मेरी बिस्कुट टॉफी
इसमें मेरी पूरी चीजे 
होने देती इसे न भारी
हम हैं मैडम के आभारी

बस्ता "माधव कौशिक"


इतना भारी भरकम बस्ता
कर देती है हालत खस्ता

सब बच्चों के भार से भारी
करता रहता मगर सवारी

कॉपी पेन्सिल, कलम किताब
हिंदी इंग्लिश और हिसाब

दुनिया भर के विषय निराले
सब बच्चों के देखे भाले

बात बताएं बिलकुल सच्ची
बहुत हो गई माथा पच्ची

काश! कोई जादू कर जाए
बस्ता खुद चलकर घर जाए

बस्ते का बोझ


इक ऐसी तरकीब सुझाओ, तुम कंप्यूटर भैया
बस्ते का कुछ बोझ घटाओ, तुम कंप्यूटर भैया

हिंदी इंग्लिश जीके का ही, बोझ हो गया काफी
बाहर पड़ी मैथ की कॉपी, कहाँ रखें ज्योग्राफी

रोज रोज यह फूल फूलकर बनता जाता हाथी
कैसे इससे मुक्ति मिलेगी परेशान सब साथी

होमवर्क इतना मिलता है खेल नहीं हम पाते
ऊपर से ट्यूशन का चक्कर झेल नहीं हम पाते

पढ़ते पढ़ते ही आँखों पर, लगा लेंस का चश्मा
भूल गया सारी शैतानी, कैसा अजब करिश्मा

घर बाहर सब यही सिखाते अच्छी भली पढ़ाई
पर बस्ते के बोझ से भैया मेरी आफत आई

अब क्या करूं कहाँ जाऊं कुछ नहीं समझ में आता
देख देखकर इसका बोझा मेरा सिर चकराता

घर से विद्यालय, विद्यालय से घर जाना भारी
लगता है मंगवानी होगी मुझको नई सवारी

पापा से सुनते आए हैं तेज दिमाग तुम्हारा
बड़े बड़े जब हार गए, तब तुमने दिया सहारा

मेरी तुमसे यही प्रार्थना, कुछ भी कर दो ऐसा
फूला बस्ता पिचक जाए, मेरे गुब्बारे जैसा

बस्ता भारी


इस भारी बस्ते को भैया,
अब तू दूर हटा दे
कमर टूटती है नित मेरी
इससे मुझे बचा ले

सुबह लादकर जब मैं
पाठशाला ले जाता
मेरी हालत पर भैया
यह मंद मंद मुस्काता

मैं नन्हा सा बालक छोटा
यह भैंसा सा भारी
चढ़ा पीठ पर मेरी बैठा
करता मारा मारी

नहीं आऊँगी "मोहम्मद साजिद खान"


बस्ता नया नया दद्दू का
देखो मेरा है भद्दा सा
नया मंगा दो वर्ना शाला
नहीं जाउंगी नहीं जाउंगी

दद्दा पढ़ते मेज बैठकर
थकू फर्श मैं पोंछ पोंछकर
प्यार करो वर्ना मैं खाना
नहीं खाऊँगी नहीं खाऊँगी

बाबा जब भी बर्फी लाते
मुझको कम दद्दा सब पाते
मांगेगे दद्दा जो चीजे
नहीं लाऊंगी नहीं लाऊँगी

करूँ समय से चौका बरतन
फिर भी क्या खुश होता है मन?
मुंह पर ताला डाल दिया अब
नहीं गाऊँगी नहीं गाऊँगी

कभी भरा होता बांहों में
मैया रोती हूँ रातों में
जाओ घर से विदा किया तो
नहीं आउंगी नहीं आउंगी

कहानी बस्ते की


कैसे किस किस समझाऊं
बस्ते की है अजब कहानी
इधर उधर क्यों पड़ी किताबें
याद दिलाती दादी नानी
अपने वस्त्रों के संग करना
बस्ते की भी साफ़ सफाई
बस्ते को तो ढोना ही है
करनी आगे और पढ़ाई
कॉपी और किताबें भर भर
बस्ता जल्दी फट जाता है
खानी पड़ती डांट पिता की
मेरा वजन भी घट जाता है
कभी अगर ऐसा हो जाए
तो हम सब हो जाए निहाल
कक्षा में ही कार्य पूर्ण हो
शेष समय बस मचे धमाल
हल्का बस्ता हो जाए तो
उसे ठीक से रखूं सम्भाल
विद्यालय से घर आने पर
तब न पलंग पर गिरू निढ़ाल

भारी बस्ता "बलवंत"

बहुत सताए भारी बस्ता
मुझे न भाए भारी बस्ता
पापा, थोड़ा कम करवा दो
नींद में आए भारी बस्ता

बस्तें की है लीला न्यारी
सब जाते है इस पर बलिहारी
भांति भांति के स्वप्न दिखाकर
मन भरमाए भारी बस्ता
पापा थोड़ा कम करवा दो
नींद में आए भारी बस्ता

कठिन हुआ खेलना खाना
भूल गये हंसना मुस्काना
चैन चुराए रैन चुराए
नाच नचाए भारी बस्ता
पापा, थोड़ा कम करवा दो
नींद में आए भारी बस्ता

लेकर इसे चला नहीं जाता
इसके बोझ से सिर चकराता
हम नन्हें मुन्ने बच्चों को
बहुत रुलाए भारी बस्ता
पापा थोड़ा कम करवा दो
नींद में आए भारी बस्ता

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