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जल पर कविता | Poems On Water In Hindi

जल पर कविता | Poems On Water In Hindi हमारे जीवन में जल का बहुत ही महत्व होता है, इसके बिना कदापि हमारा जीवन आगे नहीं बढ़ सकता और हम जल के बिना जिंदगी को अधूरा ही समझते हैं। हमारे जीवन में जल कई रूपों में होता है जिनका हम तरह तरह से उपयोग कर सकते हैं और इनका एक उपयोग यह भी है कि इस प्राकृतिक चित्रण को हम अपनी कविताओं में शामिल कर सकते हैं। अगर आप प्राचीन कवियों के बारे में सोचेंगे तो उनकी कविताओं में भी जल को एक विशेष दर्जा प्राप्त था, जिसके अंतर्गत वे अपनी कविताओं को उच्च कोटि की बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ते थे।

जल पर कविता | Poems On Water In Hindi


जल का उपयोग कभी हम अपनी कविताओं में बहते हुए आंसुओं के रूप में तो कभी ममता रूपी आंसू के रूप में करते हैं। कभी-कभी जल प्राकृतिक चित्रण को बताता है, तो कभी हमारे आसपास की होने वाली घटनाओं के माध्यम से हम अपने आंखों में जल का अनुभव करते हैं। 


ऐसे में आप जल का उपयोग कई तरीके से अपनी कविताओं में कर सकते हैं और उन्हें अच्छी तरीके से आगे बढ़ा सकते हैं।  इस धरती पर जल के महत्व को हर कहीं बयां किया जाता है, जो कहीं ना कहीं हम सब के लिए महत्वपूर्ण भी है।
 

आता भला कहाँ से पानी


अम्मा ! यह बतलाओं मुझको
आता भला कहाँ से पानी
रोज खरचते फिर मिल जाता
देख मुझे होती हैरानी !

आसमान में कहीं नदी है
उसमें कितना कितना पानी
सारी दुनिया पर बरसाता
कौन भला है ऐसा दानी?

अम्मा बोली, प्यारे बेटे !
है आकाश बरफ का टीला
गरमी में वह पिघला करता
वर्षा ऋतु में होता गीला

मानसून जब टकराते हैं
गलत बादल, झरता पानी
इसे न कोई अचरज समझो
यह है सच्ची, सरल कहानी

ओहो, चला गया पानी


देखो पानी की शैतानी
ओहो! चला गया पानी

अभी बहुत थे काम अधूरे
भर भर को अभी नहाना था
छुटकू कूद रहा है कब से
उसको पिकनिक पर जाना था
अभी न पोंछा लगा फर्श पर
बर्तन झूठे पड़े हुए हैं
कैसे पूजा अर्चन होगा
दादा जी भी कुढ़े हुए हैं

भैया जी की शेव अधूरी
देख रहे है दाएं बाएँ
कुछ गुस्से, कुछ गर्मी में हैं
घूम रहे पापा झल्लाए
मम्मी के बर्तन खड़के हैं
पानी, पानी, पानी
ओह, चला गया पानी

बूंद बूंद था टपक रहा, पर
अब तो बिलकुल डिब्बा गोल
नहीं पढ़ाई हुई अभी तक
अंग्रेजी, हिंदी, भूगोल
कैसे होमवर्क अब होगा
मम्मी चीख रही है रानी
जा, पड़ोस से भरकर ले आ
थोड़ा सा पीने का पानी

क्या क्या करूं, समझ न आए
पानी बिना अक्ल चकराए
उस पर कड़ी धुप के चांटे
सुबह सुबह तबियत अकुलाए
बिना नहाए शाला जाऊं
तुम्ही बताओ नानी
ओहो! चला गया पानी!

Best Water Poems in Hindi


पानी क़ी महिमा ध़रती पर, हैं ज़िसने पहचानी।
उससें बढकर और नही हैं, इस दुनियां मे ज्ञानी।।
ज़िसमे ताकत उसकें आगे, भरते है सब पानी ।
पानी ऊतर गया है़ ज़िसका, उसकी खत्म कहानी।।
ज़िसकी मरा आंख का पानी, वह सम्मान न पाता।
पानी ऊतरा ज़िस चेहरें का, वह मुर्दां हो जाता।।

झूठें लोगो की बाते पानी पर खिची लकीरे।
छोड अधर मे चल देगे वे, आगें धीरें-धीरें।।
जिसमे पानी मर ज़ाता हैं, वह चुपचाप रहेंगा।
बुरा-भला जो चाहें कह लों, सारी बात सहेंगा।।

लगा नही ज़िसमे पानी, ऊपज न वह दें पाता।
फ़सल सूख माटी मे मिलतीं, नही अन्न सें नाता।।
बिन पानी के गाय-बैंल, नर नारी प्यासें मरते।
पानी मिल ज़ाने पर सहसा ग़हरे साग़र भरते।।

बिना पानी के धर्मं-काज भी, पूरा कभीं न होता।
बिना पानी के मोती कों, माला मे कौंन पिरोता।।
इस दुनियां से चल पडता हैं, जब साँसो का मेंला।
गंगा-ज़ल मुंह मे जाक़र के, देता साथ अकेंला।
उनसें बचक़र रहना जो पानी मे आग़ लगाते।
पानी पीक़र सदा कौसते, वे क़ब ख़ुश रह पाते।।

पानी पीक़र ज़ात पूछते है केवल अज्ञानी।
चुल्लु भर पानी मे डूबे, उनकी दुख़द कहानी।।
चिक़ने घड़े न गीलें होते, पानी से घब़राते।
बुरा-भला क़ितना भी कह लों, तनिक़ न वे शर्माते।।

नैनो के पानी से बढकर और न कोईं मोती।
बिन प्यार का पानी पाये, धरती धीरज़ ख़ोती।।
प्यार ,दुध पानी-सा मिलता हैं ज़िस भावुक मन मे।
उससें बढकर सच्चा साथी, और नही जीवन मे।।
जीवन हैं बूलबूला मात्र ब़स, सन्त कबीर बतलातें।
इस दुनियां मे सदा निभाओं, प्रेम-नेंम के नाते।।

पानी (जल पर कविता हिंदी में)


आदमी तों आदमी
मै तो पानी के बारें मे भी सोचता था
क़ि पानी को भारत मे ब़सना सिख़ाऊगा।

सोचता था
पानी होग़ा आसां
पूर्ब ज़ैसा
पुआल कें टोप ज़ैसा
मोम की रौशनी ज़ैसा।

गोधूलि मे उस पार तक़
मुश्कि़ल से दिख़ाई देगा
और एक ऐसें देश मे भटकाएगा
ज़िसे अभी नक़्शें मे आना हैं।

ऊंचाई पर जाक़र फ़ूल रही लतर
ज़ैसे उठती रही हवा मे नामालूम गुम्बद तक़
यह मिट्टीं के घडे मे भरा रहेंगा
ज़ब भी मुझ़े प्यास लगेंगी।

शर्द मे हो जाएगा और भी पतला
साफ और धींमा
किनारें पर उगें पेड की छाया मे।

सोचता था
यह सिर्फ शरीर के हीं काम नही आएगा
जो रात हमनें नाव पर ज़गकर गुजारी
क्या उस रात पानीं
सिर्फ शरीर तक आक़र लौटता रहा?

क्या-क्या ब़साया हमनें
ज़ब से लिख़ना शुरू किया?

उजडते हुवे बार-बार
उजड़ने के बारे मे लिख़ते हुवे
पता नही वाणी क़ा
क़ितना नुक्सान किया।

पानी सिर्फ वहीं नही क़रता
ज़ैसा उससें करने के लिये कहा ज़ाता हैं
महज एक पौधें को सीचते हुवे पानी
उसक़ी जरा-सी जमीं के भीतर भी
किस तरह ज़ाता हैं।

क्या स्त्रियो की आवाजो मे बच रही है
पानी की आवाजे
और दूसरीं सब आवाजे कैंसी है?

दुख़ी और टूटें हुए हृदय मे
सिर्फ पानी कीं रात हैं
वही हैं आशा और वही हैं
दुनियां मे फ़िर से लौट आने की अक़ेली राह।

एक कटोरी पानी

रोज सवेरे माँ रख देती
एक कटोरी पानी
फुदक फुदक कर तब आंगन में
आती चिड़ियाँ रानी

डरते डरते तकते तकते
चिड़ियाँ चोंच डुबाती
हल्की सी आहट पाते ही
झट से वह उड़ जाती

लम्बे लंबे डग भरता
जल्दी जल्दी आता मोर
उधर देखता इधर झांकता
चोंच में पानी भरता मोर

लम्बी गर्दन नीली नीली
सुंदर मुकुट हिलाता
पानी पीकर पूंछ हिलाता
फिर पर फैला देता
गुटुर गुटुर गूं करे कबूतर
गर्दन खूब फैलाए
पानी देख देखकर नाचे
चक्कर खूब लगाए

फिर झुक झुक कर चोंच डुबाता
संग में डरता जाए
लेकर पानी चोंच में अपने
पंखों को नहलाए

लाल लाल मुहं वाला बन्दर
घुड़की देता आता
नीचे झुकता ऊपर उठता
लप लप पानी पीता

कांव कांव कर काला कौआ
पहले हमें डराता
फिर आंगन में बड़ी शान से
धप से नीचे आता

चोंच में अपनी पानी भरता
मुंह ऊपर कर लेता
जाते जाते भरी कटोरी
पानी बिखरा देता

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इस प्रकार से हमने जल पर कविता | Poems On Water In Hindi में जाना कि जल के माध्यम से भी हम अपनी भावनाओं को व्यक्त कर सकते हैं चाहे तो इन्हें कविताओं में डालकर हम अपने अंदर की भावनाएं व्यक्त कर सकते हैं या फिर प्राकृतिक चित्र के माध्यम से भी इन्हें दिशा निर्देश दिया जा सकता है। 

जल की खूबसूरती बहुत ज्यादा होती है, जिसे कविताओं में डालने पर एक विशेष प्रकार का प्रभाव पड़ता है। इससे पढ़ने वालों को भी अच्छा महसूस होता है और आपकी कविता भी बेहतरीन नजर आने लगती है।

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