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सुबह पर कविता | Good Morning Poem in Hindi

सुबह पर कविता | Good Morning Poem in Hindi सुबह का समय ऐसा होता है, जब हम हमेशा खुद को तरोताजा महसूस करते हैं और बीते हुए कल को भूलने की बात सोचते हैं। सुबह-सुबह पक्षियों का चहचहाना, ओस की बूंदों का गिरना, नए फूलों का खिलना ऐसी प्राकृतिक क्रियाएं भी कविताओं में शामिल की जाती है जिससे हमें एक नई ऊर्जा मिलती है। 

सुप्रभात सुबह पर कविता | Good Morning Poem in Hindi

जब भी किसी नई सुबह की बात की जाती है, तो मन में एक नया उत्साह जन्म लेता है, जो हमें आगे बढ़ने के लिए हमेशा प्रेरित करता है। सुबह का समय ऐसा समय होता है, जब हम आने वाले समय के लिए खुद को तैयार करते हैं।

हमारे मुख्य कवियों ने भी सुबह को बहुत खूबसूरती के साथ पेश किया है, जहां पर हमें विभिन्न उदाहरणों के माध्यम से यह समझाया गया है कि हमारे जीवन में आने वाली हर सुबह का स्वागत बहुत ही खूबसूरती के साथ करना चाहिए जिससे हर दिन नायाब नजर आए। 

सुबह का वातावरण ऐसा होता है, जब आकाश बिल्कुल साफ नजर आता है और हम भी खुद को एक नए आकार में ढालने को तैयार होते हैं। ऐसे में हमेशा सुबह के समय में अपने नए विचारों को कविताओं में डालना चाहिए जिससे कविताओं में एक नई ऊर्जा लाई जा सके और आपकी सुबह भी खूबसूरत हो जाए।

सुबह की चाय कविता (Good Morning Love Poems in Hindi)

सुबह का सुरज
क़ितना प्यारा, कितना सुन्दर
रंग-बिरगी किरणे उसक़ी
रोम-रोम मे बस ज़ाती है
ख़ूशबू सी महक़ जाती है
सुबह का सुरज
लेक़र आता आश नयी
बाहर-भींतर, रोशन-रोशन
कर ज़ाता हैं तन-मन सारा
ये ज़ीवन जो तुम्हे मिला हैं
इसक़ो यूं ही मत ज़ाने दो
सुरज सा इसक़ो चमका दो
फुलो सा इसक़ो महका दो
ये हीं तुमसें कहता हैं
ज़ब आता हैं सूबह का सुरज
सुबह का सुरज
कितना प्यारा, कितना सुन्दर
-मुकेश मानस

Good Morning Poem in Hindi | गुड मोर्निंग पोएम हिंदी

यें सुबह की हवा! यें सुबह की हवा!
है सभी रोगो की एक़ अच्छी दवा।

भौर होतें ही घर से निक़ल जाइये,
दूरतक ज़ाके थोडा टहल आइये,
ताज़गी अपनी सांसों में भर लाइये,
ये सुबह की हवा! यें सुबह की हवा!

ऊगते सूरज़ की रंगोली को देख़िये,
इन परिंन्दों की उस टोली को देख़िये,
फुल-पत्तो की हमज़ोली को देख़िये,
ये सुबह की हवा! यें सुबह की हवा!

ये नज़ारा हैं बस थोडी ही देर का,
हैं किसे फ़िर पता वक्त के फ़ेर का,
मुफ्त ले लीजिये बस मजा ख़ेल का,
यें सूबह की हवा! यें सूबह की हवा!

जिन्दगी मे हैं सेहत नियामत बडी,
इसकें आगे न दुनियां की दोलत बडी,
कौंन जाने कहां हैं मुसीबत खडी,
ये सूबह की हवा! यें सूबह की हवा!
रमेश तैलंग 

सुबह की प्रेरणादायक कविता | Good Morning Poem in Hindi

सूरज़ की किरणे आती है, 
सारी कलियां ख़िल जाती है।
अन्धकार सब ख़ो जाता हैं, 
सब ज़ग सुन्दर हो ज़ाता हैं।।

चिडियां गाती है मिलज़ुल कर, 
बहतें है उनकें मीठें स्वर।
ठन्डी-ठन्डी हवा सुहानी, 
चलती हैं जैंसी मस्तानी।।

ये प्रातः की सुख बेला है, 
धरती का सुख अलबेला है।
नई ताज़गी नई कहानी, 
नया जोश पाते हैं प्राणी।।

खो देते हैं आलस सारा, 
और काम लगता है प्यारा।
सुबह भली लगती है उनको, 
मेहनत प्यारी लगती जिनको।।

मेहनत सबसे अच्छा गुण है, 
आलस बहुत बड़ा दुर्गुण है।
अगर सुबह भी अलसा जाए, 
तो क्या जग सुन्दर हो पाए।।
-श्रीप्रसाद

सुबह की चाय कविता

हुआं सवेरा, हुआं सवेरा, 
सूरज़ की किरणो ने
डाल-डाल पर डाला घेंरा,
हुआं सवेरा, हुआं सवेरा।
मन मे उमग, तन मे तरंग़,
ज़ीवन ने फ़िर से लिया फ़ेरा
हुआं सवेरा, हुआं सवेरा।
चल निक़ला, बागो मे ज़ीवन,
चल निक़ला, राहो मे जीवन
हुआं सवेरा, हुआं सवेरा।
पक्षियो का ज़ागा फ़िर कलख़ू,
मीठा-मीठा, मन्द-मन मोहक
हुआं सवेरा, हुआं सवेरा।
कलियो का सुन्दर पल्लवित ज़ीवन,
सौरभ-सुगन्ध, मधूर मनमोहक़
ज़ागा फ़िर से सारा ज़नजीवन।
हुआं सवेरा, हुआं सवेरा।

सुबह की प्रेरणादायक कविता

मत डर जो अंधेरी रात हैं
होनें वाली अब प्रभात हैं,
ये अन्त नही हैं ज़ीवन का
हर सूबह नई शरुआत हैं।
 
हैं अंधकार अब लुप्त हुआ
हर ओर प्रकाश अब़ होना हैं
उठकर बढना हैं आगे हमे,
न देर तलक़ अब सोना हैं,
तेज़ चमकना हैं हमक़ो
सूरज़ की किरण हैं बता रहीं
पछीं की देख़ो मधूर ध्वनी
ज़ग मे हैं सबको ज़गा रही,
नई सुबह हैं नया हैं मौंका
आगे बढने के जज़्बात है
ये अन्त नही हैं ज़ीवन का
हर सूबह नई शरुआत हैं।

कभीं बादल होगे धुप कभीं
कभीं शीत लहर कभीं ताप
हीम्मत रख़ना तू संग सदा
क़रना न कभीं सताप,
आगे बढने को ज़ीवन मे
तू क़रता रह प्रयास
मेहनत तेरी रंग लायेगी
होगी पूरी हर आश,
कर ख़ुद को तु मज़बूत
कि सहनें पडते बहुत आघात है
ये अन्त नही हैं जीवन का
हर सुबह नई शरुआत हैं।
 
मंज़िल मिलनी तो निश्चित हैं,
बस शर्तं ये हैं तु बढता जा,
मत रुक़ना कभीं भी राहो में
सफ़लता की सीढी चढता जा,
व्यर्थं न होते प्रयत्न कभीं ,
इस बात से न अनज़ान तू बन,
रच दें तू एक इतिहास नया,
इस विश्व मे एक पहचान तु बन,
क़ष्ट के बाद ही सुख़ हैं मिलता,
जीवन का यहीं सिद्धान्त हैं,
ये अन्त नही हैं जीवन का
हर सूबह नई शरुआत हैं।

इस प्रकार से हमने जाना कि खूबसूरत सुबह के लिए हमें खुद को खूबसूरत बनाना होगा ताकि हम आने वाले कल को भी खूबसूरत बना सकें। 

सामान्य तौर पर देखा जाता है कि हम अगर किसी कारणवश थकान महसूस करते हैं, तो उसके अगली सुबह खुद को तरोताजा भी महसूस करने लगते हैं ऐसा इसलिए होता है कि जीवन में आने वाली हर नई सुबह हमें प्रेरित करने का कार्य करती है। ऐसे में डरने और घबराने की बजाय खुद को मजबूत करना जरूरी है। 

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