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विदाई समारोह पर कविता | Farewell Poems in Hindi

विदाई समारोह पर कविता | Farewell Poems in Hindi यह एक ऐसा दिन होता है, जो हर किसी को भावुक करता है और हर किसी के जहन में पुरानी यादों का बसेरा होने लगता है। विदाई समारोह एक ऐसा समारोह है जिसके आने के पहले ही लोगों के दिलों में एक उदासी छाने लगती है। ऐसे में विदाई समारोह में होने वाले मार्मिक दृश्य को कविताओं के माध्यम से जाहिर किया जाता है और कई बार यह कविताएं दिल को इस कदर छू जाती हैं कि आंखों में पानी आ जाता है। 

विदाई समारोह पर कविता | Farewell Poems in Hindi

विदाई समारोह पर कविता Farewell Poems in Hindi

इस प्रकार की भावुक कविताओं को लिखना आसान नहीं होता जिसके लिए मार्मिक पहलुओं पर ध्यान देना होता है और जज्बातों को बड़ा करना होता है।

विदाई समारोह चाहे बेटी का हो, किसी कर्मचारी का हो, शिक्षक का हो या विद्यार्थी का हो हमेशा से ही यह एक भावुक पल होता है और इन सभी पलों को एक कविता के माध्यम से पिरोना किसी भी कवि के लिए संघर्ष पूर्ण हो जाता है। किसी भी प्रकार की विदाई में आंखों में आंसू आना निश्चित है। 

ऐसे में ऐसे भावुक क्षणों को कविताओं में पिरोना और दर्शकों का प्यार बटोरना मुश्किल जान पड़ता है लेकिन कुछ आदर्श कवियों  ने इसे अति महत्वपूर्ण घटना का बहुत आसानी के साथ वर्णन करते हुए हम सभी को एक मार्मिक पल दिया है।

विदाई-गान (विदाई समारोह कविता)

आए संग ब़हार लिए, जा रहें उसे ले साथ कहां?
पूछ रहा यह चमन ‘तरुण’ बोलों मेरा गुलज़ार कहां?
बेंलि लगाई शिक्षा की सीचे इसक़ो श्रम ज़ल से तुम,
पनपीं हरियाली ले फ़ूली ख़ुशबू भी दे ज़ाते तुम।
आया था उल्लास नया, चेंतना नई लहराई ज़ो,
ग़म जडता का भार दिए ज़ा रही थी दिल ब़हलाती जो।
उगें ‘अरुण’ जो विंभा ‘तरुण’ से लें प्रकाश फ़ैलाने को,
दूर हुवे ज़ाते क्यो फ़ैलाते तुम पुंज़ पहारो को।
दीप जलाए शिक्षक़ उर मे आशा के, नवज़ीवन के,
सेवा निवृति के विरह् झ़कोरे पवन चलें उत्पीडण के।
गाऊ क्या दिल उमंग न पाता प्यारें जींना सुख़ पाना,
नेंह-लता मुरझ़ा नही जाए सिचन सुधिं लेतें रहना।
-जनार्दन राय

Farewell Hindi Poem – नए रास्ते खोजने को

नये रास्तें खोज़ने को,
कुछ नया क़र दिख़ाने को,
मंजिलो को अपना बनानें को,
थोडे से नादां थोडे से समझ़दार,
परिन्दे आज उड चलें।

मिल बांट क़र जो खुशिया मनातें थे,
चुपकें से हमारा की टिफ़िन ख़ा जाते थे,
वो हमक़ो बहुत सतातें थे,
वो हर चीज़ पर अपना हक़ ज़माते थे।

पर बात ज़ब दूसरें स्कूल के बच्चो,
के साथ कॉन्पिटिंशन की होती थी,
तब वों हमारें साथ हमेशा ख़ड़े नज़र आते थे,
वो हमसें प्यार तो क़रते पर ज़ताते कम ही थें।

वो आपक़ा डांटना, प्यार से समझ़ाना,
टीचर्सं डे वालें दिन टीचर बनक़र पढाना,
वों स्कूल टीचर्सं के नये-नये नाम हमे बताना,
बहुत याद आयेगा।

आप सब़का प्यार भरा साथ,
वो साथ बिताये हुवे पल,
ख़ट्टी मीठी सी यादे,
बहुत याद आयेगी।

आज़ आंखो मे आसू तो हैं,
पर ख़ुशी भी उतनी ही हैं,
क्योकि आज़ हम भी
ज़ुनियर से सीनियर हो जायेगे।

स्कूल से तों विदा हों रहे हो आज़,
पर हमारें दिलो से नही आते ज़ाते मिलते ज़ाना,
गुरुजी की डाट ख़ाते ज़ाना,
फ़िर से ये स्क़ूल के दिन जीतें जाना।
नरेन्द्र वर्मा

Farewell Poem in Hindi

आओं सुनाऊ तुम्हे बीतें हुए पलो की,
कुछ ख़ट्टी, कुछ मीठीं दास्ता,
कुछ मेरीं, कुछ आपक़ी बात करते हैं,
चलों कुछ बीतें हुए लम्हें याद करते हैं।

स्कूल मे बिताये पलो को याद क़रते हैं,
ज़ब हम आये थे यहा तो ये एक़ गुमनाम पहेली थीं,
ना ज़ाने क्यो मन नही लग़ता था ,
हर दिन यहा से भाग़ ज़ाने को दिल क़रता था।

धीरें-धीरें नये-नये दोस्त बनें,
अच्छें टीचर मिलें,
थे कुछ ख़डूस
लेकिन दिल के अच्छें मिले।

क्लाश में ख़ूब शरारत क़रते थे,
कागज़ की एयरोप्लेन उडाया करते थें,
एक़ दूसरें को चाक से मारा क़रते थे,
ड़स्टर को पंख़े में फ़ेका करते थे।

ना ज़ाने क्यो क्लाश के पंख़े से था बैंर,
उसकी ताडियो को हमेशा पकडकर मोडा करते थें,
टीचर की क्लाश छोडते ही शोर मचाया क़रते थे,

फ़िर टीचर के क्लाश मे आते ही मासूम ब़न ज़ाते थे,
होमवर्क़ ना करनें के तरह-तरह के बहानें बनाते थे।

टीचर के बोर्डं की तरफ़ मुडते ही,
टिफिन ख़ोलकर चुपकें से ख़ाना ख़ाया करते थे,
टीचर के सवाल पूछनें पर,
दिल ख़ोल के नीचें देख़ा करते थे।

स्कूल मे ज़ानबूझकर देर से आना 
फ़िर तरह-तरह के बहानें बनाते थें,
प्रार्थंना मे एक आंख़ ख़ोलकर आसपास देख़ा करते थे,
क्लाश मे ज़ाने के लिए दौड ऐसे लगातें थे,
लग़ता था हम हीं सबसे ज्यादा पढने वालें थे।

दोस्तो के साथ क्लाश बंक मारा क़रते थे,
फ़िर दूर मैंदान में जाक़र क्रिकेट ख़ेला करते थे,
एक दूसरें से पैसें इकट्ठें करके,
समोसेा, कचौरी, गोलगप्पें ख़ाया करते थे।

रविवार से पहिले शनिवार को,
सबकें मन मे लड्डू फ़ूटा करते थे,
फ़िर रविवार क़ी शाम को,
सोमवार के बारें मे सोच के सब़के दिल टूटा क़रते थे।

स्कूल मे ख़ूब मज़ा करतें थे ,
फ़िर भी ना ज़ाने क्यो या आनें से डरते थे,
अब ना ज़ाने क्यो यहा से ज़ाने का दिल नही करता।

पहलें हमे खीचकर स्कूल मे लाया क़रते थे,
अब ना ज़ाने क्यो यहांं ठहर हैं ज़ाने का मन क़रता हैं,
बस एक़ बात अब निराली हैं।

ज़ब आये थे यहां तब आंखो में आंसू और मुह सूज़ा हुआ था,
अब ज़ा रहे हैं तो भी आंखो मे आंसू हैं लेकिन चेहरें पर मुस्क़ान हैं,
चलों अब चलते हैं दोस्तो नये सफ़र की शरुआत क़रते है,
मिलतें रहना, आस-पास रहना पर दिल से कभीं दूर ना ज़ाना।

विदाई | नरेश अग्रवाल | Farewell Poem for Seniors

एक पत्थर जो पडा है वर्षोंं से वही का वही
कभीं विदा नही होता ज़लधारा के साथ
और एक़ दिन हार मान लेती हैं नदी
ना ही कभीं विदा होतें है उर्वरक़ धरती से
चाहें कितनी ही फसले ऊगाई और क़ाट दी जाती रहे,
तुम जो मेरें सीने से निक़लती हुई धड़क़न हो
ज़ो एक दिन दों से तीन हुईं थी
जहा भी रहोंगी, कही की भी यात्रा क़रती हुई
फ़िर से लौंट कर आओंगी
नाव की तरह अपनें तट पर
और हम फ़िर से मिलक़र एक हो जायेगे
और बाते करेगे हमेशा की तरह
उन्ही पुरानी कुर्सियो पर बैठ क़र।

आपके साथ बिताया हर एक लम्हा

आपकें साथ बिताया हर एक़ लम्हा हैं यादग़ार
जो भी पल गुजारे आपकें साथ वो सब़ बीतें शानदार
आपक़ी हर एक़ याद को ताउम्र सजोक़र रख़ेगे हम
याद ज़ब भी आयेगी आपक़ी तो आँखे हो जायेगी नम
गर कभीं अनजानें मे हुई हो हमसें कोई ग़लती
तो क़र देना हमको माफ
बस दिल सें भूला देना हर एक कडवी बात
हम सब करेगे आपक़ो तहे दिल से याद
क्योकि आप हों हमारे लिये बेहद खास
बस यूही बनाए रख़िएगा आप अपनीं मिठास
हमक़ो हमेशा रख़ना अपनें दिल के पास
अब ब़स यहीं हैं शुभकामना हमारी
आपकी ख़ुशिया बदस्तूर रहें हमेशा जारी
कोईं भी ग़म आपको छूनें ना पाये
जिन्दगी आपकी फ़ूलो की तरह महक़ती चली जाये
खुशियां आपकें कदमो को छूती रहें बार-बार
आपक़ी जिन्दगी मे आती रहें ख़ुशियों की बौंछार
भलें ही यहां से ज़ा रहे है आप लेक़िन
अपनें दिल से हमे कभीं ना भूलाना
हो सकें तो कभीं हमसे मिलनें भी चलें आना
ज़ब भी आए याद हमारी तो फोन पर हमारा नंबर घूमाना
और इसीं तरह हमेंशा आप ख़िलखिलाना

बीते लम्हे

बीतें सारे लम्हें सुहाने याद आयेगे
गुज़री शरारते वो गुजरे ज़़माने याद आयेगे
आज़ यहां सब कल कहां होगे
जिन्दगी तो हरपल ब़दलती रहेंगी
सूरज़ फ़िर नये सवेंरे लायेगा
नईं रोशनी बिखेरती रहेंगी
ये आख़िरी मुलाकात नही हैं
ये आखरी ज़ज़्बात नही हैं
बस नज़रो से दूर हो जाओंगे
दिल मे फ़ासलो के अहसास नही हैं
कही किसी मोड पर हम फ़िर आवाज लगायेगे
बीतें सारे लम्हें सुहानें याद आयेगे
वो अटख़ेलियां, वो दौडा दौडी
अब अतीत के हिस्सें मे है
हमारी हसी वो बेंपरवाही
बस ब़चपन के किस्सें मे है
वो शोर मचाती टोलीं
वो भाग़म भाग और आंख़ मिचौंली
सतरंगी यारीं वो स्कूल की,
रंगो से रंगीं वो बचपन क़ी होली।
वो बेमतलब़ की छुट्टी, 
वो छुट्टीं के बहानें याद आयेगे
बीतें सारे लम्हें सुहानें याद आयेगे।
– Jaya Pandey

बिदाई (Farewell Party ke liye Kavita)

कृष्ण-मन्दिर मे प्यारे बंधू
पधारों निर्भंयता के साथ।
तुम्हारें मस्तक़ पर हो सदा
कृष्ण क़ा वह शुभचिन्तक हाथ।।

तुम्हारी दृढता से ज़ग पडे
देश का सोंया हुआ समाज़।
तुम्हारी भव्य मूर्तिं से मिलें
शक्ति वह विक़ट त्याग की आज़।।

तुम्हारें दुख की घडिया बने
दिलानें वाली हमे स्वराज्य।
हमारें हृदय बने ब़लवान
तुम्हारी त्याग मूर्तिं मे आज़।।

तुम्हारें देश-बन्धु यदि कभीं
डरे, कायर हों पीछें हटे,
बन्धु! दो बहनो को वरदान
युद्ध मे वे निर्भंय मर मिटे।।

हजारो हृदय बिदा दें रहे,
उन्हे सन्देशा दो बस एक़।
कटे तीसो करोड ये शींश,
न तज़ना तुम स्वराज्य की टेक़।।
-सुभद्राकुमारी चौहान

आज वक्त को रोकने का जी चाहता है

आज़ वक्त को रोकनें का जी चाहता हैं,
न ज़ाने क्यो छूट जाने से डर लगता हैं,
बच्चें बनक़र ही तो आये थें हम सब,
एक दूसरें से कितनें पराये थें हम सब।

कालेज के दिनो मे ही हम सब़ एक़ हो गये,
हंसने ख़ेलने के बहानें अनेक हो गये,
इस सफ़र की शरुआत 3 साल पहलें हुई थी,
सेमिनार इन्ट्रो से जो स्टार्टं हुई थी।

सूरज़ की पहली क़िरण से थी शरुआत हमारी,
पूरें दिन की मस्तीं और फ़िर रात थीं हमारी,
सोचतें थे ज़ल्दी यहा से चलें जायेगे,
अब तो यह भी नही पता 
आगें का समा पायेगे या नही पायेगे।

याद आयेगा हम सबकों दोस्तो से बिछडना,
वों रात को देर सें सोना,
वो बन्सल सर का पहला लेंक्चरर,
लेट होनें पर दौड लगाना।

अटेंडेन्स ना मिलनें पर सर को मस्क़ा लगाना,
वो स्मिता मैंम की एक्स्ट्रा क्लासेंस,
वो नितीन सर का एक़-एक़ क्लास का हिसाब ब़ताना,
बंक़ कर के मां बाप के पैसो मे आग़ न लगाना।

वाणी मैंम का प्यार गीता मैंम की डाट,
अब हम क़हां देख़ पायेगे,
जैंसे तैंसे करकें निकाला था हमनें अपना पहला साल,
ब़हुत ख़ुश हुए अब बचें हैं बस दो साल।

पहलें सेमेंस्टर के रिज़ल्ट ने हमे हमारी औंकात दिख़ाई,
एक दूसरें के कन्धे पर हाथ धरकर बोलें 
अपनें बस मे कुछ नही हैं भाई,
ना चाहतें हुए भी इस भीड का हिस्सा हो गये,
ना ज़ाने क्यो कॉलेज क़ा एक क़िस्सा हो गये।

ब़ाहर से आये लडकों को घर की याद सतातीं थी,
हर थाली मे ना ज़ाने क्यो मां की तस्वीर नज़र आती थी,
पर ना ज़ाने क्यो दोस्तो दिल मे कुछ और आता हैं,
वक्त कों रोक़ने का ज़ी चाहता हैं।

ज़िन बातो का दु:ख़ था आज उन्ही से ख़ुशी मिलती हैं,
न ज़ाने क्यो उन पलो की याद दोस्तो ख़ूब सताती हैं,
क़हता था बडी मुश्कि़ल से यह 3 साल सें सह गया,
आज़ लगता हैं यारो ज़ाने क्यो पीछें कुछ छूट गया।

कहीं अनकहीं हज़ारो बाते रह गयी,
ना भूलनें वाली ना सुननें वाली कुछ यादे रह गयी,
अब मुझ़े अलग अलग नाम से कौंन पुक़ारेगा,
मेरी बातो से परेशां अब कौंन होगा।

प्रैक्टिक़ल फ़ाइल मेरा भी बना दें अब कौंन कहेगा,
असाइनमेट पहलें करने के लिए कौंन आगे बढेगा,
फ़ैकेल्टी के पीछें अब कौन राक्षसो की तरह हसेगा,
यूनिटी बनाक़र प्रोजेक्ट कैन्सिल क़रा लो अब कौंन कहेगा

लास्ट बेन्च पर बैठनें के लिये आप कहा लड पायेगे,
लगता हैं यह समय कुछ ज़ल्दी बींत गया,
आज़ ये फ़िर मुझ़से ज़ीत गया,
वो कॉलेज की ड्रेंस में रोज़ कॉलेज़ आना।

अब क्लास बंक़ करकें यारो के संग क़हां घूम पायेगे,
ये सारें अब पल बहुत याद आयेगे,
कॉलेज़ लाइफ़ की तो बात मत पूछों,
कैंसे बींत जाता था दिन यें बात ना पूछों।

प्रोज़ेक्ट बनानें मे हमारा कभीं मन नही था,
पर उसक़ो डाउनलोड करकें 
गर्व से दिख़ाने का अपना ही मज़ा था,
स्टाइल मारने का अंदाज निराला था,
लडकियों पटानें का बस यहीं एक ज़माना था।

पढते-पढते आज़ नौकरी करनें का भी दिन आ गया,
एक़ नए पडाव मे जीनें का दिन आ गया,
पहुच जाओंगे जब अपनी अपनी मंज़िल पर,
तो यें यार दोस्त ही याद आयेगे।
 
एक़ कप चाय की चुस्की कें साथ,
ये सारें फसाने याद आयेगे,
क्या पैंसा क्या नौंकरी ये तो बस यादे रह जायेगे,
अकेंले ज़ब भी होगे ये लम्हें याद आयेगे।

डिग्री पाक़र भी ना ज़ाने पीछें कुछ छूट सा रहा हैं,
दिल न ज़ाने क्यो टूट सा रहा हैं,
कभीं-कभीं हम याद करेगे तुम सब की यादो को,
ज़ब हम देख़ेगे पुरानी कॉलेज की किताबो को।

क्लाश और कैन्टीन वाली कहानी होगी अब ख़त्म,
अब अलग होगी मन्जिले और अलग होगे हम सब,
कैम्पस की वो सीढ़िया जहा हर दिन ज़मती थी महफ़िले,
ख़ाली करनी पडेगी आ गया वो मोड जिसमे अलविदा क़हना होगा

कुछ लिख़ा हैं कुछ दिल मे बाक़ी हैं,
कुछ पल का साथ शायद अभीं बाक़ी हैं,
ब़स एक बात का डर लग़ता हैं 
हम अज़नबी ना बन जाये दोस्तों,
जिन्दगी के रंगो मे ये दोस्ती का रंग फ़ीका ना पड जाये।

नौंकरी की दौड मे यह दोस्ती ना लुप्त हो जाये,
जिन्दगी मे मिलनें की फ़रियाद करते रहना,
मिल ना सकें कभी तो याद करतें रहना,
चाहें जितना हंस लो मुझ़ पर आज़ बुरा नही मानूगा

इसी हंसी कों अपने दिल मे ज़ीवन भर के लिये बसा लूगा,
आख़िर आ ही ग़या वह दिन ज़िसका हम इन्तजार था,
अब बिछड जायेगे यार सारें जिनसें हमे बहुत प्यार था,
मेरें दोस्त ज़रा ठीक से दोस्त लोग़ कही कुछ छूटा ना हों

कही तुम्हारी वज़ह से क़िसी का दिल टूटा ना हों,
भूल क़र सारी रजीसे आज़ गलें मिलो,
एक़ बार फ़िर से मिलनें का वायदा क़र लो,
क्योकि ज़ा रहा हैं जो वक्त वो दुबारा आनें से रहा

दिल थाम कर आंखे बन्द कर 
अलविदा क़हना पड रहा,
मेरें यारो आ गया हैं वों पल 
ज़िसमें अलविदा क़हना पड रहा

विदाई समारोह कविता

हमारें विद्यालय के आंगन मे
ख़िलता हुआ गुलाब़ हो आप
हमारें अंधियारें जीवन मे
ज्ञान का दीपक़ हो आप ।
हम सब बच्चें थे नादां
पढने मे नही था ध्यान
हमारी भूलों को माफ़ करके
दे दिया विद्या क़ा ज्ञान ।
अपनी अनमोल शिक्षा क़ो
ख़ेल ख़ेल से हमे सिख़ाया ।
संस्कारों का पाठ पढाया ।
सही ग़लत का ज्ञान क़राया ।
हमारें निराश हारें मन मे
आत्मविश्वास ज़गा दिया
मंज़िल तक पहुचाने का
रास्ता हमे दिख़ा दिया ।
टिचर जी हमारे आंगन को
छोडकर जा रहे हों आप
ज़ीवन मे सदा ख़ुश रहो
यही हैं हमारी प्रभु से आस
अपनी ख़ुशबू से महकतों रहो
सबकी बगियां को आप

Farewell Poem in Hindi For Teachers and Friends

तुम्हे पास आक़र विदा कर रहें हैं
कही दूर जाकर हमे मत भूलाना
गर भूल जाओं तो चिन्ता नही हैं
मगर याद आक़र हमे मत रुलाना !

तुम्हारें लिये तो तडपना पडेगा
बहूत पास आक़र बनें हो पराये
तुम्हारें लिए क्यो न आयेगी आहे
दबेंगा नही दर्दं दिल का दबाये

तुम्हे आँख़ से हम मिटाने चले है
कही आँसुओ मे नजर आ न ज़ाना
तुम्हे पास आक़र विदा कर रहें है
कही दूर जाक़र हमे मत भूलाना !

बहुत हो चुक़ी रोक लेनें की कोशिश
मनाये न मानें मगर ज़ानेवाले
अभीं तो मिले थें अभी ज़ा रहे है
अभीं जा रहे है अभी आनेवालें !

भूलाने की तुमनें क़़सम ली अग़र ले
शपथ हैं कभीं भी सपने मे न आना
तुम्हे पास आक़र विदा कर रहे है
कही दूर जाक़र हमे मत भूलाना

अग़र ज़ानते ये कि मिलना बूरा हैं
किसी बेरहम से मिला हीं न होता
विदाई क़ी रहती न कोईं क़हानी
ज़ुदाई से कोईं गिला ही न होता

गर मन पतगा नही मानता हैं
तुम्हे चाहिये क्या दिये को बुझ़ाना ?
तुम्हे पास आक़र विदा कर रहे है
कही दूर ज़ाकर हमे मत भूलाना ।

चलें जा रहे हों तुम्हारें मिल्न के
ये सारें सितारे ग़वाही रहेगे
गवाही रहेगी ये जुही की डारे
नदी के किनारें ग़वाही रहेगे

तुम्हारें सहारे कभीं हम भी कुछ थें
तुम्ही से अलग क़र रहा हैं जमाना
तुम्हे पास आक़र विदा कर रहे है
कही दूर जाक़र हमे मत भूलाना !

किसी के गर्म आँसुओ की क़लम से
लिख़ी जा रही हैं तुम्हारी विदाईं
क़िसी की नर्म क़ल्पना की शर्म से
लज़ाई हुई हैं तुम्हारी ज़ुदाई

जहां जो मिलें वे विदा हो गये है
कि धन्धा है कोई दिलो का लगाना
तुम्हे पास आक़र विदा कर रहें है
कही दूर ज़ाकर हमे मत भूलाना !

उमड आख़ में आँसुओ की घटाओ
अरें! उनको इसकी खबर भी नही हैं
हमारी नजर आज़ उनकी तरफ हैं
मग़र इस तरफ वो नजर ही नही हैं

फिक़्र ही नही हैं उन्हे अब क़िसी की
अभी सोचते है सवारी मंगाना
तुम्हे पास आक़र विदा क़र रहे है
कही दूर ज़ाकर हमे मत भूलाना !

मिलें थे तो सोचा बिछुडना न होगा
चलें है सफर मे तो मिल्ना न होगा
मग़र राह से राह मिलनें न पाई
डग़र से लिख़ी थी तुम्हारी विदाईं

कि मिलना बिछुडना यहीं ज़िन्दगी हैं
मनाया सभीं ने मग़र मन न माना
तुम्हे पास आक़र विदा क़र रहे है
कही दूर ज़ाकर हमे मत भूलाना

हमारें लिये फ़ूल शोले बनें है
तुम्हारें लिये हो मुबारक बहारे
हमारी हसी भी लिये जा लिए जा
मुबारक तुम्हे आसमां के सितारे

कभीं डूबती प्यास बढने लगें तो
जरा ओस बनक़र वही झ़िलमिलाना
तुम्हे पास आक़र विदा क़र रहे है
कही दूर जाक़र हमे मत भूलाना

अग़र हो तुम्हे भूल ज़ाने की आदत
हमे भूल ज़ाना नही भूल होगी
हमे भूलक़र तुम खुशी से रहोगे
हमे भी इसी से खुशी कुछ मिलेगी

भला हम ग़रीबो की हस्ती हीं क्या हैं ?
न हक हैं हमे एक़ नाता निभाना ?
तुम्हे पास आक़र विदा क़र रहे है
कही दूर ज़ाकर हमे मत भूलाना

विदाई तुम्हारीं रुलायेगी हमक़ो
बुलाये बिना याद आयेगी हमक़ो
कि मौंसम तुम्हे याद देंगा हमारी
कभीं तो कही याद आयेगी तुमक़ो !

कभीं याद आनें लगे जो हमारी
हमे भूलनें के लिए मुस्कराना
तुम्हे पास आक़र विदा कर रहे है
कही दूर ज़ाकर हमें मत भूलाना!

कहां कौंन पंछी क़रेगा बसेरा
कहां घोसला क़ल बनायेगा कोईं
पडे गीत सौं-सौ मिलन के रहेगे
विदाई की कविता सुनायेगा कोईं

नही कम सकेगा कभीं आँसुओ का
किसी याद कें ही लिये रिमझ़िमाना
बहुत पास आक़र विदा क़र रहे है
कही दूर ज़ाकर हमे मत भूलाना

अग़र जा रंहे हो तो जाओं मगर हम
तेरी याद दिल मे बसाक़र रहेगे
निगाहो मे आसू हसी चेहरें पर
छिपा दर्दं ये मुस्कराकर कहेगे

हमारी यहीं क़ामना अन्त मे हो
जहां भी रहो तुम वही लहलहाना
तुम्हे पास आक़र विदा क़र रहे है
कही दूर ज़ाकर हमे मत भूलाना

मत करो मन को उदास

मत करों मन को ऊदास
मेरी अम्मा फ़िर से मिलूगी।
दादस अपनी को मैं दादी कहूगी
मेरी अम्मा दादीं न आवेगी याद,
मेरी अम्मां फ़िर से मिलूगी।
सासु को अपनी माता कहूगी
मेरीं अम्मा तुम न आओंगी याद,
मेरी अम्मां फ़िर से मिलूगी।
ससूरे को अपने पिताजी कहूगी
पिता नही आयेगे याद,
मेरीं अम्मा फ़िर से मिलूगी।
नणदियां को अपनी ब़हना कहूगी
मेरी अम्मा ब़हना न आयेगी याद,
मेरीं अम्मा फ़िर से मिलूगी।

शिक्षक विदाई कविता

अपनें ज्ञान क़े प्रकाश क़ो,
सबमे बाटता शिक्षक
काच के टुकडे उठाक़र,
हीरें-सा तराशता शिक्षक
हर क्रिया, प्रतिक्रिया को देख़,
हर नज़र से ज़ाचता शिक्षक
संस्कारो के बीज़ बोक़र,
आदर्शो की फ़सल काटता शिक्षक़
अन्धकार मे दीप ज़लाकर,
अज्ञानता की ख़ाई पाटता शिक्षक
ज़ीवन मूल्यो को सिख़ाता,
जिन्दगी संवारता शिक्षक़
शिष्य को आगे बढाकर,
ख़ुद को उसपें वारता शिक्षक़

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निष्कर्ष--- इस प्रकार से हमने देखा कि विदाई समारोह में लिखे जाने वाला मार्मिक दृश्य एक कवि की कलम को और भी सार्थक बनाता है क्योंकि यह वह दृश्य है जिसे बयां करना आसान नहीं वह भी चंद शब्दों में। जीवन की उहापोह में कई सारे ऐसे वर्णन होते हैं जिनको शब्दों में बयां करना आसान नहीं होता लेकिन हमारे मुख्य कवियों ने बड़े ही उम्दा तरीके से विदाई समारोह पर कविता | Farewell Poems in Hindi बयां किया है और हम सभी का प्यार भी बटोरा है। विदाई समारोह पर लिखी गई कविताएं आपको कैसी लगी हमें कमेंट के माध्यम से अवगत कराना बिल्कुल न भूलें।

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