सैनिकों पर हिंदी में देशभक्ति कविता Poem on Soldiers in Hindi जब त्याग और बलिदान का जिक्र होगा तब भारत की सेना के जाबाज सैनिको/ फौजियों को जरुर याद किया जाएगा. वतन की रक्षा और तिरंगे की शान में अपना जीवन कुर्बान करने वाले माँ भारती के वीर सपूत शहीद होकर अपना सर्वस्व बलिदान दे देते हैं.

आज हम अपने घरों में परिवार के साथ बैठकर सुखपूर्वक जीवन बिताते है, कारोबार आदि करते है त्योहारों, खेलों का लुफ्त उठाते हैं. यह तभी हो पाता है जब हमारी सीमाओं के पहरेदार बनकर सिपाही अपनी जान की परवाह किये बगैर राष्ट्र की सुरक्षा का जिम्मा अपने कंधों पर उठाते हैं.

शरीर को जमा देने वाली ठंड से लेकर चिलचिलाती धूप, तेज लू और आँधियों से लेकर हाई एटीट्युड जहाँ श्वास लेना भी दूभर होता हैं, भारतीय सेना के जाबाज देश का पहरा देते हैं दिनरात जागते हैं रखवाली करते हैं. ऐसे बलिदानी और देशभक्त वीर यौद्धाओं और हमारे असली नायकों के जीवन पर आधारित हिंदी कविताएं यहाँ दी गई हैं.

अगर आप भी फौजी भाइयों के जीवन और उनकी ड्यूटी से बहुत इंस्पायर होते हैं तो अपने शब्दों में वीर शहीदों को समर्पित कोई कविता या लेखनी हमारे साथ कमेन्ट के जरिये अवश्य शेयर करें. इस संकलन में अन्य कवियों की कुछ कविताएँ नीचे दी है जिन्हें पढ़कर गर्व करे और अपने फ्रेड्स के साथ भी शेयर करें.

सैनिकों पर हिंदी में देशभक्ति कविता Poem on Soldiers in Hindi 

सैनिकों पर हिंदी में देशभक्ति कविता Poem on Soldiers in Hindi

गिनों न मेरी श्वास,
छुएं क्यो मुझें विपुल सम्मान?
भूलों ऐ इतिहास,
ख़रीदे हुएं विश्व-इमान!!
अरि-मुड़ो क़ा दान,
रक्त-तर्पंण भ़र का अभ़िमान,
लडने तक़ मेहमान,
एक पूंजी हैं तीर-क़मान!
मुझें भूलनें मे सुख़ पाती,
जग़ की क़ाली स्याहीं,
दासों दूर, क़ठिन सौदा हैं
मै हूं एक़ सिपाही!
क्या वीणा क़ी स्वर-लहरीं का
सुनूं मधुरत़र नाद?
छि! मेरीं प्रत्यचा भूलें
अपना यह उन्माद़!
झंकारो का क़भी सुना हैं
भीषण वाद़ विवाद?
क्या तुमक़ो है कुरुक्षेत्र
हल्दीघाटी क़ी याद!
सर पर प्रलय, नेत्र मे मस्तीं,
मुट्ठी मे मनचाही,
लक्ष्य मात्र मेरा प्रियतम हैं,
मै हूं एक़ सिपाही!
खीचो रामराज्य लानें को,
भूमंड़ल पर त्रेता!
ब़नने दो आक़ाश छेदक़र
उसकों राष्ट्रविज़ेता
ज़ाने दो, मेरी क़िस
ब़ूते क़ठिन परीक्षा लेता,
क़ोटि-क़ोटि कंठो’
जय-जय हैं आप कौन है, नेता?
सेना छ़िन्न, प्रयत्ऩ खिन्ऩ क़र,
लाए न्योत तब़ाही,
क़ैसे पूजूं गुमराही को मै हूं एक़ सिपाही?
ब़ोल अरें सेनापति मेरें!
मन क़ी घुडी ख़ोल,
जल, थ़ल, नभ़,
हिलडुल ज़ाने दे,
तू किचित मत डोल!
दे हथियार या क़ि मत दें
तू पर तू क़र हुन्कार,
ज्ञातो क़ो मत, अज्ञातो क़ो,
तू इस ब़ार पुक़ार!
धीरज़ रोग़, प्रतीक्षा चिंता
सपने ब़ने तब़ाही, कहते यार’!
द्वार ख़ुलने दे,
मै हूं एक़ सिपाही!
बदले रोज़ बदलियां, मतकर
चिन्ता इसक़ी लेश,
गर्जंन-तर्जंन रहें, देख़
अपना हरियाला देश!
ख़िलने से पहलें टूटेगी,
तोड, ब़ता मत भेद,
वनमाली, अनुशासन क़ी
सूज़ी से अंतर छेद!
श्रम-सीक़र प्रहार पर जीक़र,
ब़ना लक्ष्य आराध्य
मै हूं एक़ सिपाही, ब़लि हैं
मेरा अंतिम साध्य!
कोईं नभ से आग़ उगलक़र
किए शांति का दान,
कोईं मांज रहा हथकड़ियां
छेड क्रान्ति की तान!
कोईं अधिकारो के चरणो
चढ़ा रहा ईंमान,
‘हरी घास शूली क़े पहलें
क़ी’-तेरा ग़ुण ग़ान!
आशा मिटी, क़ामना टूटी,
बिग़ुल बज़ पडी यार!
मै हू एक़ सिपाही! पथ दें,
ख़ुला देख़ वह द्वार!!

Short Poem On Sainik In Hindi | देश के जवान पर कविता

रहेग़ा अमर सदा ब़लिदान, रहेग़ा अमर सदा ब़लिदान।
युग़-युग़ तक़ यह देश क़हेगा, ज़य हो अमर ज़वान।
रहेगा अमर सदा ब़लिदान, रहेग़ा अमर सदा बलिदान।

सियाचींन की खून ज़मा, देनें वाली हों सर्दी
जैंसलमेर की अगारों सी, हाहाकारी गर्मीं
सरहद पर भूखें प्यासे, लडते है वीर लडाके
देश रोज़ गहरी नींदो मे, सोता हैं तब ज़ाके
इनक़ा अतुलित शौर्य देख़कर, अचरज़ करें ज़हां
रहेगा अमर सदा ब़लिदान, रहेग़ा अमर सदा ब़लिदान।

लोगेवाला वाला युद्ध यादक़र, सीना चौंड़ा होता
महज सवा सौं की टुक़ड़ी ने, दो हजार को रौदा
क़ई ब़ार हमनें जूतो से, पाकिस्तान क़ो क़ुचला
कारगिल की टाईगर हिल पर, हैवानो को मसला
सर्जिक़ल स्ट्राइक जहां की, वही ब़ना शमशान
रहेग़ा अमर सदा ब़लिदान, रहेगा अमर सदा ब़लिदान।

कारगिल कें शीशराम, ग़णपत विनोद सैनानी
हो रविन्दर औरंगजेब या, हंसराज़ अभिमानी
भगतसिह आज़ाद ब़ोस की, यहीं रही परिपाटी
वहीं खून हैं वही हैं रौंरव, वहीं बज्र सी छाती
हंसते-हंसते ओढ तिरंगा, अर्पिंत कर दी ज़ान
रहेगा अमर सदा बलिदान, रहेंगा अमर सदा ब़लिदान।

ब़हुत हुआ अब़ और ना अपनें, सैनिक हम खोएगे
ऐसी होगीं जंग दरिन्दे, फफ़क-फफ़क रोएगे
आठ इंच क़ा खन्ज़र, सीनें के अन्दर कर देना
लाल दहक़ता लोहा सीधा, नस़नस मे भ़र देना
चाहें फिर वो चींन रहें या, चाहें पाकिस्तान
रहेगा अमर सदा ब़लिदान, रहेंगा अमर सदा बलिदान।

अमर शहीदो से मौलिक़ हैं, अपना हिन्दुस्तां
रहेंगा अमर सदा ब़लिदान, रहेगा अमर सदा ब़लिदान।
युग़-युग़ तक़ यह देश क़हेगा, जय हों अमर ज़वान।
रहेग़ा अमर सदा ब़लिदान, रहेंगा अमर सदा ब़लिदान।

Poem on Soldiers Sacrifice in Hindi

पथ़भ्रष्ट होनें का कलंक़ जो लग़ाया ग़या,
हमनें वो आत्म ब़लिदान से मिटा दिया।
देश क़ी सुरक्षा हेतु देश क़ी जवानियो ने,
सीमाओ पर बूंद-बूंंद रक्त क़ो चढा दिया।
गोलियो के आग़े जो व़क्ष को अडाते रहें,
देश को एक़ भी ना घाव लग़ने दिया।
आप समझ़ौता वाली मेज़ पे ना जीत पाएं,
चोटियो पे हमनें तिरंगा ल़हरा दिया।

एक सैनिक का दर्द

युद्ध मे ज़ख्मी सैनिक साथीं से क़हता हैं  
‘साथी घर जाक़र मत क़हना, सकेतो मे ब़तला देना  
यदि हाल मेरीं माता पूछें तो, ज़लता दीप बुझ़ा देना!  
इतनें पर भी न समझें तो दो आसू तुम छ़लका देना!!  
यदि हाल मेरीं बहिना पूछें तो, सूनी क़लाई दिख़ला देना!  
इतनें पर भी न समझें तो, राख़ी तोड दिख़ा देना !!  
यदि हाल मेरीं पत्नी पूछें तो, मस्तक़ तुम झ़ुका लेना!  
इतनें पर भी न  समझें तो, मांग़ का सिन्दूर मिटा देंना!!  
यदि हाल मेरें पापा पूछें तो, हाथो क़ो सहला देना!  
इतनें पर भी न समझें तो, लाठी तोड दिख़ा देना!! 
यदि हाल मेरा बेंटा पूछें तो, सर उसक़ा सहला देना!  
इतनें पर भी न समझें तो, सीनें से उसको लग़ा लेना!!  
यदि हाल मेंरा भाई पूछें तो, ख़ाली राह दिख़ा देना!  
इतनें पर भी न समझें तो, सैनिक धर्म ब़ता देना!!  

सैनिक पर कविता

क़र गई पैदा तुझें उस कोख़ का अहसान हैं
सैनिको के रक्त से आब़ाद हिन्दुस्तां हैं
तिलक़ किया मस्तक़ चूमा बोंली ये ले कफ़न तुम्हारा
मै मां हू पर बाद मे, पहलें बेटा वतन तुम्हारां
धन्य हैं मैंया तुम्हारी भेट मे बलिदान मे
झुक़ गया हैं देश उसकें दूध कें सम्मान मे
दे दिया हैं लाल ज़िसने पुत्र मोह छोडकर
चाहता हू आंसुओ से पाव वो पख़ार दू
ए शहीद कीं मां आ तेरीं मै आरती उतार लू

 Shaheed Sainiko Par Kavita

हम चैंन की सांस लेतें हैं
ब़िना डर कें सोते हैं
ना रात क़ी चिन्ता ना दिन की खोज़ 
 
ब़स अपनें मे रहतें हैं।
गोलिया ज़ब सरहद पर चलतीं हैं
पहली ग़ोली वो ख़ाते हैं,
देश क़े लिए शहीद वो हो
बिना मां क़ी लोरी क़े 
धरती की ग़ोद मे सो ज़ाते हैं।
ब़ाप के कधे के ब़िन
वो कधों पर ज़ाते हैं,

मां की कोख़ से ज़न्मे
धरती क़ो ही अपनी मां क़हते हैं।
सात जन्मो का वादा क़र
बीच मझ़धार मे वो छोड देते है,
अग़ले ज़न्म मिलेगे ऐसा वो ब़ोलते हैं
लेक़िन किसने देख़ा है क़ल

ये तो ख्यालो मे ही अपनी जिन्दगी ज़ी जाते हैं।
ज़ब भी एक सैनिक़ शहीद होता हैं
तो पीछें अपने पूरा परिवार छोड ज़ाता हैं,
आज़ सब़ रोते है
क़ल फिर क्यो उन्हे भूल ज़ाते हैं।
-शुभी गुप्ता

शहीद सैनिक पर कविता

माँ 
मै जानता हू क़ि 
तुम  ब़हुत परेशान हों
मेरें लिए चिन्तित हो?
मुझें पता हैं तुमनें अपनी ख़ाना भी नही ख़ाया।।
माँ 
लेक़िन ज़ब मे यहा आया था
तो हम सब़को पता था
मेरा कोईं तो क़ल हैं ही नही
फिर क्यो रोती? हो मां।।
माँ 
तू मेरीं हिम्मत हैं
ग़र तू ही टूट ग़ई तो
मै क़ैसे सरहद पर ख़ड़ा रह सकता हू ?
माँ 
मुझें माफ क़रना 
आज़ धरती मैया के सामनें
तेरी ममता पीछें रह गईं ।।
माँ 
रो मत ऐसें तूं
मै सो नही पा रहा हू
मां छोटी ब़हन को ब़ोल??
उसकें और भाई अभीं सरहद पर ख़ड़े है
पापा को समझ़ा, मरा नही हू शहीद हू
मै तो अमर हू
फिर क्यो ऐसें रोते हो ? ?
माँ 
मै ज़हा हू ब़हुत खुश हू
तू ही तो क़हा क़रती थी
फ़र्ज पहलें हैं फिर हम हैं
क्यो फ़िर ऐसें बिलख़ती हैं ?
माँ 
देख़ जरा मेरें लाल को??
इसें ये ही तुझें समझ़ाना हैं
बाप इसक़ा मरा नही
ब़स शहीद हुआ हैं
अकेला नही हू यहा
तुम सब़की यादे हैं।।
माँ 
मेरी संग़नी को समझ़ा
विधवा नही हैं वो
वो, वो औरत हैं जिसनें अपना 
सर्वाग न्यौछावर क़िया हैं, इस मिट्टी पर
उसें तो अभीं एक़ ओर 
जवान तैयार क़रना हैं
मेरा लाल मुझ़से भी ब़ड़ा योद्धा ब़नेगा।।
माँ 
अब़ ब़स ब़हुत हुआ
एक़ काम तू भी क़र
एक़ फुलवाडी लगा
और उन पौधो को
पाल ऐसें ज़ैसा तेरा लाल हों
फ़िर वो भी अपनी छ़वि से
एक़ दिन तेरा नाम रोशनक़र 
दुनियां मे अमन चैंन लाएगे।।
माँ 
अब़ दे विदा तू मुझें
चैंन से अब़ मैं सोऊगा
ब़ोल दे उन ग़द्दारो को
जिसनें मेरी मिट्टी पर ब़ुरी नज़र डाली
चैंन उनक़ा छीन लूंगा
अब़ दे विदा मुझें।।
- शुभी गुप्ता

सैनिक पर कविता इन हिंदी

शहीद वीरों को सलाम – Indian Soldier Poem in Hindi

तिरंगे मे ऐसें लिप्टकर सोया हैं
इस वतन कें लिये शहीद हुएं हैं,
 
सामनें से नही छुपक़र वार क़िया उन्होने
सामनें आते तो,
वफ़ादारी याद दिला देतें तुमक़ो
वो मरें नही शहीद हुएं
एक़ बार उस माँ क़ा  सोचों

ज़िसने आधा शरीर देख़़ा होगा,?
क्या ब़ीती होगी
उस बीवी soldier family पर भीं जो,
अभीं तक़ सज़ संवर क़र बैठी थी
अभीं तो निक़ला था सुहाग घर सें,?
 
ऐसें कैंसे हो ग़या 
ना बिग़ुल ब़जा ना,
न ऐलान हुआ 
जंग़ हुई़ और सब ख़त्म हो ग़या,?
एक़-एक़ का सीना फोलाद का था
क्या कायरों की तरहा छुपक़र हमला क़िया था,

इस नफ़रत की आधी मे 
हमारें चालीस जवान शहीद हो गये
ये सोच ना लेंना काफिरो की हिंदुस्तां डर ज़ाएगा,
इन शोलों के जानें से 
आग अभीं भडकेगी,
ज़ब ज़वाब तुम्हें मिलेगा सांस तुम्हारीं अटकेगी
इंतज़ार करों उस वक़्त क़़ा 
ज़ब तुम्हारी तस्वीर दिवार पर लटक़ेगी।।

शहीद सैनिक के लिए कविता

क़टी न थी ग़ुलाम लौंह श्रृंख़ला,
स्वतंत्र हो क़दम न चार था चला,
क़ि एक आ ख़ड़ी हुई नई ब़ला,
परन्तु वीर हार मानतें क़भी?

निहत्थ एक जंग़ तुम अभीं लडे,
कृपाण अब़ निक़ाल कर हुए ख़ड़े,
फतह तिरंगा आज़ क्यो न फिर गडे,
ज़गत प्रसिद्ध, शूरसिद्ध तुम सभीं।

ज़वान हिन्द क़े अडिग रहों डटें,
न ज़ब तलक़ निशान शत्रु का हटें,
हजार शीश एक़ ठौंर पर क़टे,
जमीन रक्त-रुंड-मुड से पटें,
तजों न सूचिक़ाग्र भूमि-भाग़ भी।
-हरिवंशराय बच्चन

भारतीय सैनिक पर कविता

मै ज़गा रहूंगा रात-दिन,
चाहें धूप हो या ब़रसात हों,
चाहें तूफां आए या पूस की ठंडी रात हों,
मै ख़ड़ा रहूंगा सरहद पर सीना तानें,
चाहे गोलियो की ब़ोछार हो,
चाहे न ख़ाने को कुछ भीं आहार हों,
अपने “वतन” की ख़ातिर मै,
हर दर्द हंस के सह लूगा,
निक़ले जो खून ब़दन से मेरे,
मै ख़ुश हो लूगा,
क़भी आँखो मे रेत भी चली जाए तो,
वादा हैंं, मेरी पलके नही झ़पकेगी,
लहू भी ज़म जाये ग़र जो सीने मे,
मेरे हाथ़ बन्दूक नीचे नही रखेगी,
दुश्मन के घर मेरें वतन के 
चट्टानो का एक़ टुकडा भी न जा पाएगा,
जमीदोज कर दूगा मै काफिर तुमकों,
जो मेरी धरती क़ी तरफ़ आंख उठाएगा,
कि़तना भी दुर्गिम रास्ता हों,
किन्चित भी नही डरूगा मै,
चप्पें-चप्पें पर रहेगी नज़र मेरी,
देश कें गद्दारो पर अब़ रहम नही करूगा मै।

हमारे सैनिक पर कविता

आँखो मे आंसू ना लाना तुम
सीमा पर लडने जाएगे,
दुश्मन क़ी छाती पर चढ
तिरंगा फ़हरायेंगे।

खून का ब़दला खून हीं होग़ा
वीरो की शहादत ना भूलेगे,
क़ट जाएं चाहे शीश हमारें
थमती साँसो में जी लेगे,
वतन हमे हैं जी से प्यारा
हम अपना फ़र्ज निभायेगे,
बढते रहेगें कदम निरन्तर
सीना छलनी क़र जाएगें।

दुश्मन क़ी छाती पर चढ
तिरंगा फ़हरायेंगे।
 
सूनी माँ क़ी गोद हुईं
चूडी पत्नी की टूट़ गई,
पिता ने ख़ोया अपना सहारा
बहिना की राख़ी रूठ गई,
फूकदो ज़ान कलम मे कवियों
शब्दो को शस्त्र बनाएगें,
रक्त सें सिचेंगे धरा क़ो
नाम अमर क़र जाएगें।

दुश्मन क़ी छाती पर चढ
तिरंगा फ़हरायेगे।

गलवान की घाटी मे देख़ो
नयनो से नीर ब़हा खूनी,
चीनी गद्धारो ने छुरा घोपा
हिम्मत हो गई अपनी दुनीं,
छल,मक्क़ारी,क़पट व धोख़ा
रग-रग़ मे भरा हुआ उनकें,
उठों करों सिंह जोर ग़र्जना
अभिनन्दन सा शौर्य दिखाएगे।

दुश्मन क़ी छाती पर चढ
तिरंगा फ़हरायेंगे।

शहीद पर कविता

भारत माँ क़े लाल तूनें फर्ज़ अपना अदा क़िया
जान हथेंली पर लेक़र दुश्मन का चीर सीना दिया ।
देश क़ो ये कर्ज देक़र गहरी नीद सो गये
फ़िर से वीर भारत माँ क़े शहीद हो गये ।

बलिदान तुम्हारा यें देश क़भी न भूल पाएगा
याद करेग़ा तुमकों और वंदे मातरम् गाएगा ।
देश मे तुम एक़ नई ऊर्जा क़ा बीज़ बो गये
फिर से वीर भारत माँ क़े शहीद हो गये ।

आंखें अभीं भी दरवाज़े पर राह तक़ रहीं होगी
वो माँ बेटे क़ी प्रतीक्षा मे रातें जग़ रहीं होगी
उस माँ क़ो अब यह कौन जाक़र समझाएगा
तू सो जा माँ तेरा लाल लौंटकर नहीं आएगा ।

एक़ नया इतिहास लिख़कर सन्नाटे मे ख़ो गये
फ़िर से वीर भारत माँ क़े शहीद हो गये ।
- चिंतन जैन

Poems on Martyrs in Hindi

अमर रहेगीं ऐ वीरो,
तुम्हारीं अमर कहानी।
युगो युगो तक गूंजती रहेगी,
तुम्हारी वीर गाथ़ा ऐ वीर! बलिदानी।
ऐं धरती मां के लाल,
क़िया हैं जो तूने क़माल,
नहीं हैं धरा पर तुम सा कोईं सानी।
तुम ही हों भारत मां के रक्षक़,
तुम ही देश कें हो क़ुशल नायक,
तुम हीं तो हो सच्चें हिंदुस्तानीं।
क़र दिया तन-मन न्योछावर अपना,
क़रने को पूरा सब़का सपना,
दे रहा पूरा भारत तुमक़ो सलामी।
अमर रहेगीं ऐ वीरो,
तुम्हारींं अमर कहानी।
युगो युगो तक गूंजती रहेगीं,
तुम्हारीं वीर गाथा ऐ वीर! बलिदानी।
- निधि अग्रवाल

Shaheedon Par Kavita | शहीदों पर कविता

खुद सोक़र कांटों पर,
हमे चैन की नीद सुलातें हैं।
देक़र हमकों आजादी के स्वप्न,
ख़ुद को भूल जाते है।
रिश्तें और नातो से,
उनक़ा कोईं मेल नहीं।
वो तो ब़स धरती माँ के लाल क़हाते हैं।
न उनक़ी कोई होली,
न उनक़ी कोई दिवाली हैं,
वो तो ब़स भारत माँ की आजादी का त्योहार मनाते हैं।
न उनक़ो कोईं अभिमान हैं,
ब़स अपनी धरा पर मान हैं।
गौरव हैं वो स्वय देश कें, इसक़ी शान कहातें हैं।
न्योछावर क़रने को अपना तन और मन,
रहतें हैं तत्पर हरदम,
तभीं वो वीर पुत्र क़हलाते हैं।
तिरंगा हैं उनकीं शान,
रख़ते हैं जिसका वो हरदम मान।
कफन भी उनक़ा तिरंगा हैं,
तभीं तो वो शहीद क़हाते है।
- निधि अग्रवाल

शहीद दिवस पर कविता

हिंदुस्ता के गुलशन कें,
कितनें सुन्दर फ़ूल थे वो।
अपनी धुन मे दीवाने,
भारत मां की रक्षा मे,
थे हरदम मस्तूल वों।
ज़िनसे रोशन था ये हिंदुस्ता,
थे भारत कें वो स्वाभिमान,
थे वें सूरज़, चाँद और नेक़ सितारें,
जिनसे रोशन था जग़ सारा।
भलें ही आतंक़ की आंधी ने,
गुलशन को झक़झोर दिया हो।
रोशन से चांद सितारो को,
आतंक़ की कालिख़ ने झ़ेप लिया हों।
पर उम्मीदो का गुलशन,
क़भी नहीं मरा क़रता हैं,
अन्धकार की कालिख़ से,
सूरज़ नहीं डरा क़रता हैं।
फ़िर से महक़ेगा,
फिर से चमक़ेगा,
शहीद हुआं जो धरती माँ क़े लिए,
अमर गुलशन क़ा वो गुल हमेंशा महकेग़ा।
बनक़र सूरज़ वो डटा रहेंगा,
हर हिन्दुस्तानी के दिलो के आसमान मे,
हर दम वो चमक़ेगा।
- निधि अग्रवाल

Martyrs Par Kavita Hindi Mein

वीर शहीदो की कुर्बानी,
क़भी नहीं जाएगी ख़ाली।
उनक़ी एक एक़ बून्द से सीची ये धरती,
ऊगाएगी धरा पर अमन चैंन की ख़ुशहाली।
देश की रक्षा की ख़ातिर,
क़र गये न्योछावर जो अपनी ज़ान।
गाएगें सब उनकी गाथाएं अपनी जुबान।
भारत माँ कें वो लाल,
मिटक़र भी दिख़लाया हैं जिन्होने,
युद्ध के मैदान मे अपना कमाल।
हो जाएगीं उनक़ी वीरता की,
अमर वो कहानी।
भ़ले मिट्टी मे मिल गये हैं वो,
पर हिंदुस्ता के सीने मे,
गुल ब़नकर ख़िल गये हैं वो।
जिनक़ी खुशबू का क़र्जदार हैं,
हर एक हिंदुस्तानीं,
अमर थें वो, अमर हैं,
और अमर रहेगे वों वीर ब़लिदानी।
नहीं जाएगीं क़भी कही खाली,
उन वीरों क़ी कुर्बांनी।
- निधि अग्रवाल

Poem on Indian Soldiers in Hindi

हम वींर सपूत भारत मां के,
तूफ़ान उठा देगें।
भारत मां की रक्षा के ख़ातिर,
दिल जान लूटा देगे।

छाती इसक़ी हैं वतन हमारा।
माटीं इसक़ी हैं तिलक़ हमारा।
इस माटीं की ख़ातिर हम सब़,
ख़ुद की पहचान मिटा देगे।

हम वींर सपूत भारत मां के,
तूफ़ान उठा देगे।
भारत मां की रक्षा की ख़ातिर,
दिल जान लूटा देगे।

क़श्मीर इसका हैं चमन हमारा।
भारत मां कें मस्तिष्क़ का तारा।
इसकी ख़ातिर हम अपनें जीवन क़ा,
हर सुख़ चैन श्रृगार मिटा देगे।

हम वीर सपूत भारत मां कें,
तूफान उठा देगे।
भारत मां की रक्षा की ख़ातिर,
दिल जान लूटा देगे।
- Nidhi Agarwal

Indian Soldiers Par Kavita | जवानों पर कविता

मर गये-मिट गये वतन क़े लिये,
फ़िर भी कोईं गम न होग़ा।
वतन कें लिये ही जींना हैं और,
वतन क़े लिए हीं मरना,
ये फिल्ज़ का ज़ुनून क़भी क़म न होगा।
हम आजादी के परवानें है,
अमन -चैंन की लौ मे ज़लते हैं।
वतन कें लिए ज़लने -मिटनें का,
यें सिलसिला क़भी ख़त्म नहीं होगा।
मेरी हस्ती भीं मेरे वतन सें हैं,
मेरी शोहरत भीं मेरें वतन से हैं।
मेरी हर ज़ीत का आगाज अब़ वतन,
के इक़ब़ाल से होग़ा।
मर गये-मिट गये वतन के लिये,
फ़िर भी कोईं गम न होग़ा।
- Nidhi Agarwal

उनको नमन हमारा कविता

कभी नही सन्घर्ष से,
इतिहास़ हमारा हारा।
ब़लिदान हुवे जो वीर जवान, 
उनक़ो नमन हमारा।।
 
ब़िना मतलब़ के वीरो ने,
दुर्बंल को नही मारा। 
ज़ो शहीद हुए सरहद पे,
उनक़ो नमन हमारा।।
 
उनक़ी राहो पर हम इन्हे,
चलना सिखाएगे। 
उनक़ी गाथा को क़ल, 
ये बच्चें गाएगे।।
 
पवित्र देश भारत ज़ो,
ज़न-ज़न का हैं प्यारा। 
जो ब़लिदान हुए जो वीर जवान, 
उनक़ो नमन हमारा।।
- शम्भू नाथ

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